रहमान डकैत की असली कहानी

रहमान डकैत की असली कहानी जिसने अपनी मां तक को नही बख्शा

रहमान डकैत एक ऐसा खतरनाक नाम कि जिसको इंडिया में भले ही अभी तक बहुत कम लोग जाना करते थे मगर पाकिस्तान में तो बच्चा-बच्चा जानता है। उसकी वजह यही है कि अगर पिछले 40-50 साल के इतिहास पर नजर डाली जाए तो जो पहचान इंडिया के अंदर दाऊद इब्राहिम नाम को मिली हुई है। बिल्कुल वही या उस जैसी ही पहचान पाकिस्तान के अंदर रहमान डकैत नाम को मिली हुई है। लेकिन अब आप में से बहुत सारे लोग यह भी सोच रहे होंगे कि आज अचानक से यहां पर रहमान डकैत का जिक्र क्यों? तो दोस्तों, उसकी मेन वजह है बॉलीवुड की आने वाली एक नई फिल्म कि जिसका नाम है धुरंधर। इस फिल्म के अंदर जो सबसे मेन किरदार दिखाए गए हैं उन्हीं किरदारों में से एक किरदार का नाम है रहमान डकैत। रहमान डकैत की दी हुई मौत। बड़ी कसाईनुमा होती है। रहमान डकैत की असली कहानी

जी हां, वही रहमान डकैत कि जिसने एक लंबे वक्त तक पाकिस्तान को हिला कर रखा था। तो हमारी इस कहानी का आगाज 1970 और 80 के दौर से होता है कि जिस दौर में जहां एक तरफ इंडिया में मुंबई शहर के अंदर पूरी एक अंडरवर की दुनिया पनप रही थी। तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के कराची शहर के अंदर भी कई ऐसे बड़े-बड़े गैंग्स एक्टिव हुआ करते थे कि जिनका असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पाकिस्तान से भी बाहर दूर-दूर तक हुआ करता था। इन्हीं बड़े-बड़े गैंग्स की गैंग वॉर के बीच में ही जन्म होता है रहमान डकैत का। अभी रहमान डकैत की उम्र काफी कम ही रही होगी कि एक मशहूर गैंगस्टर ने रहमान डकैत के फादर को खत्म कर दिया था।

उसकी वजह यही थी कि रहमान डकैत का खुद का फादर भी कराची की क्राइम दुनिया का एक मशहूर नाम था। जहां तक सवाल खुद रहमान डकैत का है तो उसके बारे में भी कई रिपोर्ट्स यह दावा करती हैं कि उसने क्राइम की दुनिया में कदम सिर्फ 13 साल की उम्र में ही रख दिया था। 13 साल का था कि जब उसने किसी झगड़े की वजह से अपने पड़ोसी को चाकू के जरिए से कत्ल कर दिया था और इसी के आसपास में ही यानी जब वो इतनी ही उम्र का या इससे थोड़ा ऊपर नीचे की उम्र का रहा होगा तभी उसने अपनी मां को भी कत्ल कर दिया था।

जी हां, आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं। उसने अपनी मां को कत्ल कर दिया था। वो भी सिर्फ इस वजह से क्योंकि उसको शक हो गया था कि शायद उसकी मां किसी दूसरे गैंग के बंदे के साथ इनवॉल्व है।

साथियों, इतनी कम उम्र में ही अपने हाथों को अपने आसपास के लोगों के खून से रंग लेने के बाद रहमान डकैत अब अपने घर से फरार हो गया। और यहां से फरार होते ही फिर रहमान डकैत की जिंदगी में उस खास और अहम इंसान की एंट्री हुई थी कि जिसने रहमान डकैत को पूरी तरीके से बदल कर रख दिया। बल्कि हम यह कह सकते हैं कि रहमान डकैत के जो अभी तक रहमान डकैत बना ही नहीं था बल्कि रहमान बलोच हुआ करता था उसको रहमान बलोच से रहमान डकैत बनाने वाला यही इंसान था और इस इंसान का नाम था हाजी लालू। हाजी लालू दरअसल उस दौर में कराची के एक डॉन के तौर पर देखा जाता था। एक बहुत बड़ा गैंगस्टर था जो अपना पूरा एक गैंग चलाया करता था।

उसने इस कम उम्र रहमान बलोच को ना सिर्फ अपनी सरपरस्ती में लिया बल्कि मानो उसको अपना बेटा ही बना लिया और उसके जो अपने बेटे थे उनकी तरह ही इसकी परवरिश करनी शुरू कर दी। हाजी लालू के दो खुद के अपने भी बेटे हुआ करते थे जिनके नाम थे यासिर रफ और अरशद पप्पू। अब अरशद पप्पू, यासिर रफ और रहमान डकैत तीनों ने मिलकर हाजी लालू के गैंग को चलाना शुरू कर दिया। और तीनों ने मिलकर फिर कराची और खासतौर से उसके लेरी के इलाके में वो तबाही और बर्बादी मचाई कि जिसको किसी ने इमेजिन भी नहीं किया था।

शुरुआती दिनों में ही रहमान डकैत की क्राइम की लिस्ट हद से ज्यादा लंबी हो चुकी थी। मर्डर, किडनैपिंग, टॉर्चर, जमीनों पर कब्जा करना, हथियारों या फिर ड्रग्स जैसी चीजों की स्मगलिंग करना। मतलब अब कोई ऐसी चीज थी नहीं कि जिससे रहमान डकैत का नाम जुड़ा हुआ ना हो। केसेस की तादाद तो इतनी ज्यादा हो चुकी थी कि इनकी गिनती ना तो खुद रहमान डकैत को पता थी और ना ही वह इनको गिना करता था।

अपने बिल्कुल शुरुआती दौर में ही रहमान डकैत ने पुलिस की नाक में दम कर रखा था। पुलिस ने उस दौर में ही लाखों का इनाम इसके सर पर रख दिया था। मगर तमाम कोशिशें बेनतीजा रहा करती थी। अब रहमान डकैत हाजी लालू की सरपरस्ती में बड़ी ही तेजी के साथ आगे बढ़ रहा था। कहा जाता है कि हाजी लालू ने रहमान डकैत के साथ कभी कोई भेदभाव नहीं किया बल्कि वह अपने बाकी बेटों की तरह ही एक बेटा समझता था। इवन रहमान डकैत की शादी भी हाजी लालू ने ही करवाई थी। दूसरी तरफ रहमान डकैत भी हाजी लालू का बड़ा वफादार था।

उस दौर में जो कराची के बाकी बड़े-बड़े गैंग्स थे, वह आए दिन उसको ऑफर करते रहते थे। उसको अपने गैंग में लाने के लिए बड़ी-बड़ी डील उसके सामने रखा करते थे। मगर वह सारी चीजों को ठुकरा देता था। उसकी वजह यही थी कि वह भी हाजी लालू को अपना बाप ही समझा करता था और हाजी लालू के जो दोनों बेटे थे उनको अपना भाई समझता था। मगर इन सारे लोगों को भी अभी तक इस बात का इल्म नहीं था कि अब इन सबकी जिंदगी में सबसे बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। और यह सबसे बड़ा जो मोड़ आया था वो किसी और चीज की वजह से नहीं बल्कि पैसे की वजह से आया था।

रहमान डकैत के जो लगातार क्राइम की दुनिया में अपने बाप जैसे हाजी लालू के लिए काम कर रहा था। तो इस काम के बदले में इकट्ठी होने वाली ढेर सारी रकम जमा होती जा रही थी और यह ढेर सारी रकम कहीं और नहीं बल्कि हाजी लालू के पास जमा हो रही थी। शायद उसकी वजह यह रही थी कि मौके पर जब भी रहमान डकैत को पैसे दिए जाते थे या रकम देने का वक्त आता था तो उसको जरूरत नहीं होती थी और वह यह सोचकर हाजी लालू के ही पास छोड़ दिया करता था कि यह उसके बाप की तरह है और जब भी उसको जरूरत पड़ेगी तो वह सारे ही पैसे एक बार में हासिल कर लेगा। मगर वक्त के साथ अब धीरे-धीरे यह रकम इकट्ठा होकर 1 करोड़ के करीब पहुंच चुकी थी।

जी हां, यहां पर याद रखने वाली बात यह है कि यह 80 90 के दौर की बात चल रही है। अगर आज के हिसाब से देखें तो यह रकम हद से ज्यादा बड़ी हो जाएगी। तो जब रहमान डकैत ने हाजी लालू से अपनी यह रकम वापस मांगी तो हाजी लालू ने सीधे तौर पर वो रकम देने की बजाय अब टालमटोल शुरू कर दी। बात यहां तक बिगड़ गई कि अब हाजी लालू ने अपने असर का इस्तेमाल करते हुए उस रहमान डकैत को जेल में डलवा दिया कि जो रहमान डकैत अभी तक पुलिस के कभी हत्ते नहीं चढ़ा था।

अब रहमान डकैत जेल में तो जा चुका था मगर साथ ही वो हाजी लालू और अरशद पप्पू मतलब पूरे खानदान का जानी दुश्मन भी बन चुका था और इनको लेकर गुस्से से खौल रहा था। कुछ वक्त के बाद ही रहमान डकैत जेल से भागने में कामयाब भी रहा और जेल से निकलने के बाद उसने जो सबसे पहला काम किया वो था हाजी लालू और उसके खानदान से बदला लेना और बस साथियों यहीं से ही अरशद पप्पू के गैंग और दूसरी तरफ रहमान डकैत का गैंग के कि जो उसने बाद में अपना ही बना लिया था।

इन दोनों के बीच वो गैंग वॉर शुरू हुई कि जिसने अगले कई सालों तक कराची की सड़कों पर खून की वह दास्ताने लिखी कि जिनको इतिहास के पन्नों से कभी नहीं मिटाया जा सकेगा। और खून की इस लंबी और दर्दनाक दास्तान में जो इंसान सबसे पहला निशाना बना था वो दरअसल अरशद पप्पू की बीवी का सगा मामू था जो किसी जनाजे से मतलब फ्यूनरल से वापस आ रहा था और इधर रहमान डकैत जेल से वापस आ चुका था उसने सबसे पहले इसी को घेर कर कत्ल कर डाला और दर्दनाक तरीके से कत्ल करने के फौरन बाद हाजी लालू और अरशद पप्पू को मैसेज भिजवाया कि मैंने तुम्हारी फैमिली से बदला लेने की शुरुआत कर दी है और यह तो शुरुआत है

अब आगे-आगे देखो होता है क्या? दूसरी तरफ अरशद पप्पू भी इस मामले से पूरी तरह से हिल गया था और मानो कि उसने कसम खा ली थी कि अब वह रहमान डकैत को इस दुनिया से ही खत्म कर डालेगा और उसने बदले की अपनी इस कार्रवाही में जिस इंसान को सबसे पहले निशाना बनाया वो इंसान कोई और नहीं बल्कि खुद रहमान डकैत का चाचा था। उसने पहले तो रहमान डकैत के चाचा को कहीं पर घेरा और घेरने के बाद फौरन कत्ल नहीं किया बल्कि पहले रहमान डकैत को कॉल लगाई और फिर कॉल पर ही उसके चाचा को टॉर्चर किया और उसको गोलियों से भून डाला।

मतलब अरशद पप्पू ने रहमान डकैत को कॉल पर सुनाते हुए ही उसके चाचा को बड़ी बेदर्दी के साथ कत्ल किया था। दूसरी तरफ रहमान डकैत जो यह सब कुछ सुन रहा था वो तड़प रहा था, तिलमिला रहा था मगर फिर भी कुछ कर ना सका। हैरानी की बात यह है कि अरशद पप्पू का खून अभी भी ठंडा नहीं हुआ था। उसने यहीं पर बस नहीं की बल्कि अब उसने कराची के अंदर जो लियारी का इलाका था जहां पर रहमान डकैत के अहम ठिकाने थे उनको एक-एक करके टारगेट करना शुरू कर दिया।

बात इतनी ज्यादा आगे बढ़ गई कि अब धीरे-धीरे रहमान डकैत को यह यकीन हो गया कि किसी ना किसी दिन यह लोग मुझको भी टारगेट कर सकते हैं। तो इसीलिए वह अपनी जान बचाने की खातिर टेंपरेरी कराची छोड़कर बलूचिस्तान की तरफ चला गया और वहां पर जाकर एक बार फिर से नए तरीके से उसने अपने नेटवर्क को और भी ज्यादा मजबूत करना शुरू किया और यह इंतजार करने लगा कि कब सही टाइम आएगा और मैं वापस कराची के लियारी में लौटूंगा और अरशद पप्पू हाजी लालू इनके पूरी फैमिली से बदला लूंगा।

जब एक तरफ रहमान डकैत यह सब कुछ कर रहा था तभी दूसरी तरफ अरशद पप्पू ने रहमान डकैत के एक और भी करीबी दोस्त को कत्ल किया जिसका नाम था फैजू। फैजू रहमान डकैत का इतना ज्यादा करीबी था कि जब उसको कत्ल किया जा रहा था तो रहमान डकैत ना सिर्फ रो रहा था बल्कि अरशद पप्पू से बार-बार मन्नतें कर रहा था कि वो उसकी सारी बातें मान लेगा लेकिन वो उसको कत्ल ना करे। लेकिन अरशद पप्पू ने आखिर में उसको कत्ल करके ही दम लिया।

वैसे यहां पर इस फैजू का जिक्र करना इसलिए जरूरी है क्योंकि जिस वक्त इसका कत्ल हुआ था उस वक्त इसका एक बेटा भी हुआ करता था जिस बेटे को फिर रहमान डकैत ने बिल्कुल उसी तरह से ही अपनी सरपरस्ती में ले लिया था जिस तरह से किसी दौर में खुद रहमान डकैत को हाजी लालू ने अपनी सरपरस्ती में लिया था और जानते हैं कि यह फैजू का बेटा कौन था तो यह था उज़ैर बलोच जी हां वही उज़ैर बलोच के जो आने वाले दिनों में ना सिर्फ रहमान डकैत की गद्दी संभालने वाला था बल्कि इस क्राइम की दुनिया में उससे भी बड़ा और खतरनाक नाम बनने वाला था।

कहानी पर वापस आए तो रहमान डकैत का दबदबा एक बार फिर से कराची में बढ़ने लगा था। बल्कि इस बार तो उसने कराची के अंदर पहले से भी ज्यादा ताकत के साथ अपने कदम जमा लिए थे और उसकी सिर्फ एक ही वजह थी और वो वजह थी कि पाकिस्तान की एक पॉलिटिकल पार्टी उसको सपोर्ट करने लगी थी। इस पार्टी का नाम था पीपल्स पार्टी। जी हां वही के जिस पार्टी से पाकिस्तान की फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर बेनजीर भुट्टो का ताल्लुक था और आज के हिसाब से देखें तो उन्हीं बिलाबल भुट्टो की पार्टी के जो इन्हीं बेनजीर भुट्टो के बेटे हैं और मौजूदा दौर में पाकिस्तान के काफी मशहूर पॉलिटिशियन हैं।

अब रहमान डकैत क्राइम की दुनिया में तो पहले ही कराची का सबसे बड़ा नाम समझा जाता था। अंदर ही अंदर पूरा उसका एक मजबूत नेटवर्क था। मगर अब कि जब एक राजनीतिक पार्टी ने भी उसके सर पर हाथ रख दिया था तब तो उसकी ताकत और उसके असर की कोई हद ही नहीं रही थी।

वो और उसका साथी मतलब उज़ैर बलोच मानो एक बेलगाम घोड़े की तरह हो चुके थे और कराची के मानो मालिक बन चुके थे। रहमान डकैत के असर और उसकी ताकत को अगर आप लोगों को देखना है तो आपको 18 अक्टूबर 2007 के दिन पर नजर डालनी पड़ेगी कि जब पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो एक लंबे एग्ज़ाइल के बाद पाकिस्तान वापस लौट रही थी।

लाखों की तादाद में लोग उनका स्वागत करने के लिए कराची एयरपोर्ट पर पहुंचे हुए थे। मगर इसी भीड़ के दौरान अचानक से बड़ा धमाका हुआ। कार से होने वाले इस बड़े धमाके में लगभग 140 लोगों की जान चली गई और हर तरफ अफरातफरी का माहौल हो गया और जानते हैं कि ऐसे खतरनाक और डरावने माहौल में बेनजीर भुट्टो की सिक्योरिटी के लिए उनकी हिफाजत के लिए वहां पर कौन मौजूद था? पाकिस्तान की आर्मी जी नहीं पाकिस्तान की पुलिस वो भी नहीं। आईएसआई वो भी नहीं बल्कि रहमान डकैत था।

जी हां, आज भी वह फोटोस हर तरफ वायरल होते रहते हैं कि जिसमें देखा जा सकता था कि ऐसे माहौल में बेनज़ीर भुट्टो की गाड़ी का जो स्टीयरिंग था वो दरअसल रहमान डकैत के हाथों में था। वही वो इंसान था कि जिसने वहां से बेनजीर भुट्टो को निकालकर भुट्टो हाउस तक पहुंचाया था। अब आप यहां पर खुद ही देख लीजिए कि रहमान डकैत एक तरफ तो क्राइम की दुनिया का वो सबसे बड़ा नाम था कि जिसके ऊपर पुलिस ने सबसे ज्यादा इनाम रखा हुआ था। मगर उसके बावजूद भी वो उसको पकड़ती नहीं थी। वो उसको कुछ नहीं कहती थी।

आप यह कह सकते हैं कि पुलिस जो थी या सिस्टम जो था वो उसकी ताकत और असर के सामने बेबस था। दूसरी तरफ जो पॉलिटिशियंस थे उनके लिए तो रहमान डकैत ऐसा था कि वो सिक्योरिटी के मामले में कराची में सबसे ज्यादा भरोसा ही इसी पर कर रहे थे। जबकि तीसरी तरफ देखें तो अब धीरे-धीरे कराची के आम और गरीब लोगों में रहमान डकैत अपनी एक हीरो मतलब कि रॉबिन हुड की छवि भी बना चुका था। वो सोसाइटी के कमजोर और गरीब लोगों के लिए जो कुछ भी करता रहता था उसकी वजह से वह तमाम लोग इसको अपना मसीहा मान बैठे थे।

मगर अब हुआ यह कि वो जो पॉलिटिकल पार्टी थी कि जिसने रहमान डकैत के सर पर हाथ रखा हुआ था उसको ही रहमान डकैत से डर लगने लगा। डर लगने की वजह थी रहमान डकैत का हद से ज्यादा तेजी के साथ बढ़ता हुआ असर। इवन जो पॉलिटिकल पार्टी थी उसके ऊपर भी अब क्लियरली रहमान डकैत का असर दिखने लगा था। कराची शहर के अंदर कौन किस पोस्ट पर बैठेगा? टिकट किसको बांटे जाएंगे और कौन क्या करेगा यह सारी चीजें भी अब रहमान डकैत के असर से तय होने लगी थी।

इसीलिए ऐसा दावा किया जाता है कि इस पॉलिटिकल पार्टी ने ही यह डिसाइड कर लिया था कि रहमान डकैत को निपटा दिया जाए और बस यहीं से इस कहानी में एंट्री होती है एक और अहम किरदार की कि जिनको एसएसपी चौधरी असलम के नाम से याद किया जाता है जो पाकिस्तान के अभी तक के सबसे धाकड़ पुलिस वाले के तौर पर याद किए जाते हैं।

अब वैसे तो यह जो चौधरी असलम है यह खुद में ही एक ऐसी पर्सनालिटी है कि जिनके ऊपर अगर सही से बात की जाए तो एक अलग और बड़ी वीडियो की जरूरत पड़ेगी।

मगर आज अगर सिर्फ अपने मुद्दे पर ही रहते हुए बात करें तो अब हुआ यह कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और ऐसे ही गैंगस्टर से निपटने में माहिर समझे जाने वाले चौधरी असलम को भी रहमान डकैत से निपटने की जिम्मेदारी दी गई। चौधरी असलम ने अपनी एक स्पेशल फोर्स बनाई और अपने मिशन पर लग गए।

अब हुआ यह कि एक दिन अचानक से चौधरी असलम को अपने नेटवर्क के थ्रू यह खबर मिली कि जो रहमान डकैत है वह बलूचिस्तान के हब के इलाके में मौजूद है। चौधरी असलम फौरन अपनी स्पेशल टीम को लेकर निकल पड़े। रास्ता में ही एक ट्रक के अंदर इन लोगों ने अपने कपड़े बदले, अपना हुलिया बदला। मगर हुआ यह कि जैसे ही यह उस खास इलाके में पहुंचे कि जहां पर रहमान डकैत के होने की खबर मिली थी तो इन लोगों के होश उड़ गए। क्योंकि वहां पहुंचते ही इन लोगों के ऊपर खतरनाक हमला हो गया।

गोलियां चलने लगी और देखते ही देखते इनकी टीम के कई लोग गोलियों से छलनी हो गए और तो और खुद चौधरी असलम की भी गोलियां लगी। वह बुरी तरीके से जख्मी हुए। इमरजेंसी में हेलीकॉप्टर के जरिए से उनको कराची पहुंचाया गया। दरअसल हुआ यह था कि रहमान डकैत को इन लोगों की पल-पल की खबर थी। उसको खबर थी कि यह लोग कब निकल रहे हैं, कहां पहुंच रहे हैं, कहां पहुंच चुके हैं…

और क्या-क्या कर रहे हैं। इवन उसने तो जगह-जगह पर सीसीटीवी कैमरास तक लगवा रखे थे जिनके थ्रू वो इन सबको देख भी सकता था। अब चौधरी असलम बाद में वैसे तो इन खतरनाक जख्मों से भी उभर गए थे। ठीक हो गए थे। लेकिन जो उनको रहमान डकैत ने अंदर से जख्म दिए थे, उन्होंने चौधरी असलम को हिला कर रख दिया था।

चौधरी असलम ने अब अपनी जिंदगी का सिर्फ एक मकसद ही यही बना लिया था कि उनको सिर्फ और सिर्फ रहमान डकैत से निपटना है। कुछ वक्त के बाद एसएसपी चौधरी को यह मौका मिल भी गया। उन्होंने एक बार फिर से अपनी पूरी टीम के साथ छापा मारा और इस बार रहमान डकैत को आखिर गिरफ्तार कर भी लिया। कराची में जो उनकी अपनी खास जेल थी वहां पर उसको लाया गया और वहां पर उल्टा लटका कर बकायदा रहमान डकैत को काफी टॉर्चर किया गया। इस टॉर्चर के जरिए से उसकी ज़िंदगी के जितने जुर्म थे उनमें से ज्यादातर को कबूल भी करवा लिया गया। मगर खास बात यह थी कि इस बार यह जो रहमान डकैत को गिरफ्तार किया गया था इसको ऑन रिकॉर्ड नहीं लिया गया था।

मतलब कागजी तौर पर तो रहमान डकैत गिरफ्तार ही नहीं हुआ था बल्कि यह सब कुछ एसएसपी चौधरी असलम और उनके कुछ ऊपर नीचे के लोग मिलकर कर रहे थे। मगर हैरानी की बात तो यह है कि यहां पर भी एक बार फिर से रहमान डकैत इन तमाम लोगों को चकमा देने में कामयाब हो गया। वो इस तरह से कि जब अगले दिन चौधरी असलम वापस अपने इस जेल में आए तो उनके यह सुनकर होश उड़ गए कि रहमान डकैत तो भाग चुका है और बाद में पता चला कि चौधरी असलम के ही टीम के जो एक दो लोग थे उनसे रहमान डकैत ने डील कर ली थी और उनको ऑफर दिया था कि अगर वह उसकी भागने में मदद करें तो वह उनको 5 करोड़ देगा।

इस तरह से रहमान डकैत अपनी जिंदगी में एक बार फिर से जेल से भागने में कामयाब हो चुका था। मगर जाहिर है यह चीज चौधरी असलम जैसे लोगों के लिए उनकी पर्सनालिटी पर एक काला धब्बा थी। क्योंकि पूरे पाकिस्तान में उनका दबदबा ही इसी वजह से था क्योंकि उनको क्राइम दुनिया के ऐसे बड़े नामों से निपटने के लिए जाना जाता था।

तो इसीलिए यह समझा जाता है कि उसी वक्त ही चौधरी असलम ने यह कसम खा ली थी कि अगली बार रहमान डकैत को अरेस्ट नहीं किया जाएगा बल्कि एनकाउंटर होगा और नोट करने वाली बात यह है कि बिल्कुल हुआ भी ऐसा ही। 9 अगस्त 2009 के दिन अचानक से सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरे दुनिया के मीडिया में अब यह खबर दिखने लगी कि लेरी का सबसे बड़ा डॉन सबसे बड़ा नाम मारा गया। मतलब रहमान डकैत का एनकाउंटर हो चुका था। लेकिन जाहिर है यह एनकाउंटर तो सिर्फ दिखावे का था।

वरना हर कोई जानता था कि यह कुछ और नहीं बल्कि एक बदला है। रहमान डकैत के चले जाने के बाद क्राइम की दुनिया की उसकी इस गद्दी को उज़ैर बलोच ने संभाला और उसने तो फिर रहमान डकैत को भी पीछे छोड़ दिया। उसने वह काम किए कि जिनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। फिलहाल रहमान डकैत की कहानी यहीं पर खत्म होती है

रहमान डकैत की असली कहानी

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